Friday, 28 December 2012

आखिर क्यों?

आखिर क्यों ?
कभी मुझे पैदा नहीं होने दिया
जब पैदा हुई, तो तुमने मुझे जीने नहीं दिया
कभी बाप, कभी भाई
कभी पति बनकर
तुम मेरे अरमानो को हरदम रौंदते रहे
आखिर क्यों?
क्यों सीता से लेकर द्रोपदी तक,
क्यों जेसिका से लेकर दामिनी तक, 
कभी मुझे अग्निपरीक्षा देनी पड़ी, 
तो कभी सरे महफिल
बेलिबास करने की कोशिश हुई,
कभी मुझे मार गया, तो कभी
मेरे दामन को तार तार किया तुमने।
आखिर क्यों?
जब मैं बड़ी हुई तो क्यों महज़ एक मांस का लोथड़ा हुई,
और तुम पल भर में गिद्ध हो गए,
तुम्हारी कातिल निगाहें मेरे जिस्म को नोचती रही,
तुम्हारी हवस का शिकार जगह जगह मैं होती रही।
आखिर क्यों?
मैं कभी माँ, कभी बेटी हुई
कभी बहन, तो कभी पत्नी हुई
कभी दोस्त, तो कभी प्रेमिका हुई
हर रूप, हर रंग, हर रिश्ते में, सिर्फ मैं ही क्यों छली गयी,
हर वक्त तुम ज़ालिम और मैं मजलूम होती गयी।
आखिर क्यों?
मेरे कौमार्य को जब तुमने क़त्ल किया
जब अपनी मर्यादा और मेरी इज्ज़त को तुम लांघ गए
ना मेरी उम्र देखी, न मेरे आंसू
न मेरी चीख सुनी तुमने, न मेरी दुहाई
आखिर क्यों?
लहू लुहान निर्वस्त्र मुझे जब सड़क किनारे फ़ेंक दिया गया
तब कई आये तमाशबीन बनकर
और सब अपनी नज़र से बलात्कार करते रहे
क्यों मैं हमेशा तुम्हारे उपभोग की वस्तु बनी रही
क्यों तुम मुझे अब तक समझ ना सके
आखिर क्यों?

एक तरफ पूरा देश युवती के साथ बस में गैंग रेप करने वालों को सख्त सजा देने की मांग कर रहा है, पर तथ्य यह है कि सबसे ज्यादा दरिंदगी दिखाने वाला आरोपी सबसे कम सजा पाकर मुक्त हो जाएगा। इस आरोपी को नाबालिग होने का फायदा मिल जाएगा। जूवेनाइल ऐक्ट के तहत वह कुछ महीनों के बाद ही जेल से बाहर आ जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक गैंग रेप के दौरान इस लड़के ने पीड़ित के साथ सबसे क्रूर व्यवहार किया था। यदि क्राइम करने के बाद वह 18 साल में पकड़ा जाता है तो जूवेनाइल ऐक्ट के तहत उसे किसी सुधार गृह में नहीं रखा सकता है। उसे किसी भी तरह के नाबालिग सुधार गृह में रखने की अनुमति नहीं मिलती है। दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया को दौरान उसकी उम्र 18 साल से ऊपर भी हो जाती है तो उसे वयस्कों के साथ तिहाड़ जेल में नहीं रखा जा सकता है। तिहाड़ जेल के पीआरओ सुनील गुप्ता ने कहा कि हम किसी वैसे कैदी को तिहाड़ में नहीं रख सकते जिसका केस जूवेनाइल ऐक्ट के तहत चला हो। जूवेनाइल आरोपियों का केस जेजे ऐक्ट के तहत चलता है और इसमें मैक्सिमम सजा जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड की तरफ से 3 साल की दी जाती है। हालांकि, ट्रायल के दौरान नाबालिग वयस्क हो जाता है और फिर से क्राइम करते पाया जाता है तो उसे सुधार गृह में नहीं रख रखा जा सकता है। लीगल एक्सपर्ट का कहना है कि जेजे ऐक्ट बनाते वक्त कानूनविदों ने इन स्थितियों पर ध्यान नहीं दिया था।

एक तरफ पूरा देश युवती के साथ बस में गैंग रेप करने वालों को सख्त सजा देने की मांग कर रहा है, पर तथ्य यह है कि सबसे ज्यादा दरिंदगी दिखाने वाला आरोपी सबसे कम सजा पाकर मुक्त हो जाएगा। इस आरोपी को नाबालिग होने का फायदा मिल जाएगा। जूवेनाइल ऐक्ट के तहत वह कुछ महीनों के बाद ही जेल से बाहर आ जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक गैंग रेप के दौरान इस लड़के ने पीड़ित के साथ सबसे क्रूर व्यवहार किया था।

यदि क्राइम करने के बाद वह 18 साल में पकड़ा जाता है तो जूवेनाइल ऐक्ट के तहत उसे किसी सुधार गृह में नहीं रखा सकता है। उसे किसी भी तरह के नाबालिग सुधार गृह में रखने की अनुमति नहीं मिलती है। दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया को दौरान उसकी उम्र 18 साल से ऊपर भी हो जाती है तो उसे वयस्कों के साथ तिहाड़ जेल में नहीं रखा जा सकता है। तिहाड़ जेल के पीआरओ सुनील गुप्ता ने कहा कि हम किसी वैसे कैदी को तिहाड़ में नहीं रख सकते जिसका केस जूवेनाइल ऐक्ट के तहत चला हो।

जूवेनाइल आरोपियों का केस जेजे ऐक्ट के तहत चलता है और इसमें मैक्सिमम सजा जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड की तरफ से 3 साल की दी जाती है। हालांकि, ट्रायल के दौरान नाबालिग वयस्क हो जाता है और फिर से क्राइम करते पाया जाता है तो उसे सुधार गृह में नहीं रख रखा जा सकता है। लीगल एक्सपर्ट का कहना है कि जेजे ऐक्ट बनाते वक्त कानूनविदों ने इन स्थितियों पर ध्यान नहीं दिया था।

Thursday, 27 December 2012

my friend ganeshaa- bal ganesh ji.


ॐ नम: शिवाय,ॐ नम: शिवाय,-ॐ नम: शिवाय, ॐ नम: शिवाय,ॐ नम: शिवाय,.....- directory


कद्र कब होती है इंसान की


तू अकेली नहीं है , पूरा देश तेरे साथ खड़ा है


FORGIVENESS IS DIVINE


FORGIVENESS IS DIVINE

To err is human and to forgive is divine. As you go through the tough lessons in life, you encounter situations that demand you forgive those who hurt you or did not give you your due or made you feel less or caused you agony and misery or left you in a relationship. You cannot be living with hurt and pain and carrying this kind of baggage for long. There are certain steps you need to follow to practice complete forgiveness and move on for your own sake. Read more click the link below

Tuesday, 25 December 2012

उसकी धुन

जब उसकी धुन में रहा करते थे ,हम भी चुप चुप जिया करते थे
लोग आते थे गजल सुंनाने ,हम उसकी बात किया करते थे
घर की दीवार सजाने के खातिर ,हम उसका नाम लिखा करते थे!
कल उसको देख कर याद आया हमे ,
हम भी कभी मोहोब्बत किया करते थे ,लोग मुझे देख कर उसका नाम लिया करते थे

महोबत का इम्तेहान

दर्द की दास्ताँ अभी बाकी है,
महोबत का इम्तेहान अभी अभी बाकी है ,
दिल करे तो फिर से वफ़ा करने आ जाना,
दिल ही तो टुटा है ,
जान अभी बाकी है ..

दर्द

उन्होंने अपना कभी बनाया ही नहीं,
झूठा ही सही प्यार दिखाया ही नहीं,
गलतियां अपनी हम मान भी जाते,
पर क्या करें कसूर हमारा हमें बताया ही नहीं.
दर्द ज़ाहिर कभी करने नहीं देता मुझको
अश्क आंखों में भी भरने नहीं देता मुझको
जानता हूँ , कि मैं अब टूट चुका हूँ लेकिन
वो तो इक शख्स बिखरने नहीं देता मुझको !

इंतजार

हसीं चेहरे पर कभी ऐतबार ना करना,
तोड देते हैं दिल कभी प्यार ना करना,
है गुजारिश सबसे मेरी, मर जाओगे,
वो ना आयेंगे कभी इंतजार ना करना..

प्यार

सितारों को रौशनी की क्या ज़रूरत,
ये तो खुद को जला लेते है.
आशिकों को वफ़ा की क्या ज़रूरत,
वो तो बेवफा को भी प्यार कर लेते है.

काश वो पल

काश वो पल संग बिताए न होते
जिनको याद कर के ये आँसू आये ना होते
खुदा को अगर इस तरह दूर ले जाना ही था
तो इतनी गहराई से दिल मिलाए ना होते

बेचैन

जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना
खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं,
टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ
देख लेना कोई आइना तोड़ कर;
मैं तो जब जब नदी के किनारे गया
मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया,
पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी
उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया,
रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर
आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर,

हाथो की लकीरे

काश बाजारो मे हाथो की लकीरे बिकती....... तो हम अपने पसंद की लकीर खरीद लेते ........

मै


कुछ अजनबी से नए अपनों के संग में हु मै
नयी दुनिया नए सपनो की नयी उमंग में हु में
ये दुश्वारिया कब बदल सकी है शक्शियत मेरी 
यारो आज देखो फिर से अपने उसी रंग में हु मै ...


सत्य वचन


देख तेरे इंसान की हालत क्या हो गयी भगवान


“कोई ऐसा दोस्‍त बनाया जावे जिसके आंसू को पलकों में छुपाया जाये रहे उसका मेरा रिश्‍ता कुछ ऐसा कि अगर वो उदास हो तो हमसे भी ना मुस्‍कुराया जावें ”

“कोई ऐसा दोस्‍त बनाया जावे
जिसके आंसू को पलकों में छुपाया जाये
रहे उसका मेरा रिश्‍ता कुछ ऐसा
कि अगर वो उदास हो तो हमसे भी ना मुस्‍कुराया जावें ”

हम अपना दर्द किसी को कहते नही ! वो सोचते हैं की हम तन्हाई सहते नही !! आँखों से आँसू निकले भी तो कैसे !! क्योकि सूखे हुवे दरिया कभी बहते नही !!

हम अपना दर्द किसी को कहते नही !
वो सोचते हैं की हम तन्हाई सहते नही !!
आँखों से आँसू निकले भी तो कैसे !!
क्योकि सूखे हुवे दरिया कभी बहते नही !!

दर्द होता नही दुनियाँ को दिखाने के लिए ! हर कोई रोता नही आँसू बहाने के लिए !! रूठने का मज़ा तो तब आता हैं दोस्तों...! जब अपना हो कोई मनाने के लिए...!!

दर्द होता नही दुनियाँ को दिखाने के लिए !
हर कोई रोता नही आँसू बहाने के लिए !!
रूठने का मज़ा तो तब आता हैं दोस्तों...!
जब अपना हो कोई मनाने के लिए...!!







Sunday, 23 December 2012

इंसानियत के इन 3 मददगारों को सलाम..................

इंसानियत के इन 3
मददगारों को सलाम............................................ क्या आप यकीन करेंगे कि दिल्ली में 16
दिसंबर को हुए गैंगरेप के बाद लड़की और उसके
दोस्त को चलती बस से नीचे
धक्का नहीं दिया गया था,
बल्कि दोनों को करीब-करीब उठा कर हवा में
उछालते हुए नीचे फेंका गया था. अगर
ऐसा नहीं होता तो दोनों सड़के किनारे पड़े होते
जबकि जिन तीन लोगों ने सबसे पहले उन
दोनों को देखा और जिन्होंने दोनों की मदद
की उनकी मानें तो वो दोनों सड़क से करीब-करब
सात-आठ फुट दूर झाड़ियों में पड़े थे.
एक तरफ वो 6 वहशी जिन्होंने दिल्ली क्या पूरे
देश को शर्मसार कर दिया और दूसरी तरफ हैं
इंसानियत के ये तीन मददगार. ये वही तीन लोग
हैं, जिन्होंने 16 दिसंबर की रात को सबसे पहले
गैंगरेप की शिकार लड़की और उसके दोस्त
को सड़क किनारे लहुलुहान देखा और फिर सबसे
पहले पुलिस को खबर दी और फिर
दोनों को पुलिस के साथ अस्पताल ले गए.
ज़ाहिर है उस रात दर्द के उस मंज़र और चीखते
ज़ख्मों के ये तीनों ना सिर्फ चश्मदीद हैं
बल्कि आज भी उस रात की याद भर इन्हें
सहमा जाती है.
एनएच आठ की देखभाल करनेवाली कंपनी के इन
तीन मुलाज़िमों जीत, सुरेंद्र और राजकुमार के
मुताबिक रोज़ की तरह उस रात
भी तीनों पेट्रोलिंग पर थे. तभी सड़क से करीब
सात-आठ फुट दूर किनारे झाड़ियों से कराहने
और बचाओ बचओ की आवाज सुनाई दी. अंधेरे
में आवाज की तरफ देखा तो पाया कि एक
लड़का जमीन पर गिरा हाथ उठा कर मदद मांग
रहा है. लेकिन पत्थरों की ओट में पहुंचते
ही उन्होंने जो कुछ देखा, उनके होश उड़ गए.
झाड़ियों में लड़के के साथ कही ज़मीन पर एक
लड़की बुरी तरह लहूलुहान पड़ी थी. दोनों के
जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था.
लड़की के जिस्म में कोई हरकत नहीं हो रही थी.
वो पूरी तरह बेहोश थी और खुद लड़के
को भी तब तक अंदाजा नहीं था कि लड़की के
साथ बस मे क्या हुआ? तीनों ने सबसे पहले
तो अपने कुछ कपड़े उतार कर
दोनों को ढका फिर नजदीक के ही एक होटल से
भाग कर चादर लाए. चादर के दो टुकड़े करने के
बाद उससे दोनों को ढका. इस बीच वो पीसीआर
को 100 नंबर पर रॉल कर चुके थे. करीब दस
मिनट बाद पीसीआर भी पहुंच गई.
इन तीनों ने तो अपनी इंसानियत दिखाई लेकिन
एक कड़वी सच्चाई ये भी बताई कि इस दौरान
वहां से कई गाड़ियां गुजरीं, कुछ रुकीं कुछ
चली गईं, पर उनमें से किसी ने भी मदद के
दो हाथ नहीं बढ़ाए.

Do You Know about love


Best Friendship


Every one is your friend


Duniya her roz badlti hai

Duniya her roz badlti hai

Thursday, 20 December 2012

Dedicated to the girl suffering, please share.

Dear Friends, 


Dedicated to the girl suffering, please share.

What is my fault?

If I was born as a girl to my lovely little family. What is my fault, if my dad taught me to live my life happily and freely as he was always there to back me and protect me from this world. What is my fault if my teacher taught me that India is a democratic country, I can breathe as I like, I can laugh as I like and I can live as I like. I had a happy and normal life, just like you. But one day my life changed, I got victim of few people’s lewdness. I got raped.

I screamed, I cried, I hauled but there was no body to hear my heart crying scream. I pleaded to those beasts to leave me for the sake of humanity, but they didn't. I was in unbearable pain, I was begging them to pity me, but they didn't. With my body, my heart too was in pain, extreme pain.

They were so brutal to me as if I was a non living thing, didn't they notice me breathing? They could have easily bought sex in few bucks, then why did they do this to me at the cost which I can’t afford for my entire lifetime?
Was the cost of my life so cheap for them, that they denied pitying me and threw me to die?

People say it’s the fault of the “Inappropriate Dress”, is it?
Then why do women get raped although wearing a Saree and Punjabi dress?
Then why do small little kids get raped? Their innocent heart would be the “Inappropriate” thing.
And why do boys get raped now days too? They must be walking freely in the street and that would be the “Inappropriate” thing – Bogus excuses.

IS IT MY FAULT?

NO, IT IS NOT.

It is the fault of those satyr maniacs out there who are in search of every next girl whose life they can destroy and fulfill their heinous and shameful desires. It is the fault of the law which is not strong enough, and therefore such people are not afraid of it before carrying out such an act.

That day, my heart died but body still breathes, for the ones who love me and that are my family and friends. I scream for JUSTICE and so do they.

- Today is was her. Tomorrow it could be you or the one you love the most. Share and raise your voice and demand justice for her by demanding from the government, the most brutal punishment ever to those inhuman ppl, so that such an act never ever takes place in future.