एक तरफ पूरा देश युवती के साथ बस में गैंग रेप करने वालों को सख्त सजा देने की मांग कर रहा है, पर तथ्य यह है कि सबसे ज्यादा दरिंदगी दिखाने वाला आरोपी सबसे कम सजा पाकर मुक्त हो जाएगा। इस आरोपी को नाबालिग होने का फायदा मिल जाएगा। जूवेनाइल ऐक्ट के तहत वह कुछ महीनों के बाद ही जेल से बाहर आ जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक गैंग रेप के दौरान इस लड़के ने पीड़ित के साथ सबसे क्रूर व्यवहार किया था।
यदि क्राइम करने के बाद वह 18 साल में पकड़ा जाता है तो जूवेनाइल ऐक्ट के तहत उसे किसी सुधार गृह में नहीं रखा सकता है। उसे किसी भी तरह के नाबालिग सुधार गृह में रखने की अनुमति नहीं मिलती है। दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया को दौरान उसकी उम्र 18 साल से ऊपर भी हो जाती है तो उसे वयस्कों के साथ तिहाड़ जेल में नहीं रखा जा सकता है। तिहाड़ जेल के पीआरओ सुनील गुप्ता ने कहा कि हम किसी वैसे कैदी को तिहाड़ में नहीं रख सकते जिसका केस जूवेनाइल ऐक्ट के तहत चला हो।
जूवेनाइल आरोपियों का केस जेजे ऐक्ट के तहत चलता है और इसमें मैक्सिमम सजा जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड की तरफ से 3 साल की दी जाती है। हालांकि, ट्रायल के दौरान नाबालिग वयस्क हो जाता है और फिर से क्राइम करते पाया जाता है तो उसे सुधार गृह में नहीं रख रखा जा सकता है। लीगल एक्सपर्ट का कहना है कि जेजे ऐक्ट बनाते वक्त कानूनविदों ने इन स्थितियों पर ध्यान नहीं दिया था।
यदि क्राइम करने के बाद वह 18 साल में पकड़ा जाता है तो जूवेनाइल ऐक्ट के तहत उसे किसी सुधार गृह में नहीं रखा सकता है। उसे किसी भी तरह के नाबालिग सुधार गृह में रखने की अनुमति नहीं मिलती है। दूसरी तरफ कानूनी प्रक्रिया को दौरान उसकी उम्र 18 साल से ऊपर भी हो जाती है तो उसे वयस्कों के साथ तिहाड़ जेल में नहीं रखा जा सकता है। तिहाड़ जेल के पीआरओ सुनील गुप्ता ने कहा कि हम किसी वैसे कैदी को तिहाड़ में नहीं रख सकते जिसका केस जूवेनाइल ऐक्ट के तहत चला हो।
जूवेनाइल आरोपियों का केस जेजे ऐक्ट के तहत चलता है और इसमें मैक्सिमम सजा जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड की तरफ से 3 साल की दी जाती है। हालांकि, ट्रायल के दौरान नाबालिग वयस्क हो जाता है और फिर से क्राइम करते पाया जाता है तो उसे सुधार गृह में नहीं रख रखा जा सकता है। लीगल एक्सपर्ट का कहना है कि जेजे ऐक्ट बनाते वक्त कानूनविदों ने इन स्थितियों पर ध्यान नहीं दिया था।

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