suvichar
Tuesday, 25 December 2012
महोबत का इम्तेहान
दर्द की दास्ताँ अभी बाकी है,
महोबत का इम्तेहान अभी अभी बाकी है ,
दिल करे तो फिर से वफ़ा करने आ जाना,
दिल ही तो टुटा है ,
जान अभी बाकी है ..
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